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विकसित हुआ है। आदिकाल में वीरता और भक्ति काल में भक्ति पर जोर दिया गया, जबकि रीतिकाल में श्रृंगार और आधुनिक काल में गद्य (जैसे कहानी, उपन्यास) और खड़ी बोली का विकास हुआ। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य को आदिकाल (वीरगाथा काल), भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिक काल में विभाजित किया, जो साहित्यिक प्रवृत्ति, भाषा विकास

